खानकाहे नियाज़िया में रमज़ान उल मुबारक का पहला रोज़ा इफ्तार, हाज़िरीन में दिखा रूहानी जोश

बरेली। खानकाहे नियाज़िया में रमज़ान उल मुबारक के आगमन के साथ ही रूहानी माहौल और उत्साह बढ़ गया। पहली रमज़ान को हज़रीन के लिए सहरी और इफ्तार का विशेष इंतज़ाम किया गया, जिससे माहौल में आध्यात्मिक और सौहार्दपूर्ण रंग छा गया। इस अवसर पर ताजुल औलिया हज़रत शाह निज़ामुद्दीन किब्ला (रअ) का रोज़ा सालाना उर्स कदीमी रिवायत और सूफियाना रस्मों के अनुसार शुरू हुआ।

दोपहर 2:10 बजे विसाल के कुल की रस्म अदा की गई, जिसके तुरंत बाद जायरीन के लिए इफ्तार का आयोजन हुआ। इस दौरान नमाज़-ए-मगरिब के बाद चादरपोशी और गुलपोशी की रस्में संपन्न की गईं। वहीं, नमाज़-ए-असर के बाद सज्जादा नशीन हज़रत मेंहदी मियां नियाज़ी साहब ने खानदान के साथ मिलकर लंगरखाने में फातिहाख्वानी की और जायरीन में लंगर वितरित किया।
रात में नमाज़-ए-ईशा और तरावीह के बाद महफिल-ए-कव्वाली में सूफियाना कलाम पेश किया गया। रात 12 बजे कुल शरीफ का खास कलाम पढ़ा गया और चिश्तिया रंग, दुआ और तबर्रुक की तकसीम की गई। इस अवसर पर अजमेर शरीफ, दिल्ली शरीफ और कलियर शरीफ की दरगाह कमेटियों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
खानकाह प्रबंधन ने बताया कि सज्जादा नशीन के निर्देश पर सभी इंतज़ाम पूर्ण और व्यवस्थित रखे गए ताकि जायरीन को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इस आयोजन ने शहर में रमज़ान उल मुबारक की रौनक और आध्यात्मिक चेतना को और बढ़ाया, और हज़रीन ने सूफियाना परंपराओं और भाईचारे का संदेश एक साथ अनुभव किया।
इस प्रकार खानकाहे नियाज़िया ने अपने परंपरागत अंदाज में पहले रोज़े का इफ्तार और धार्मिक रस्मों को सफलतापूर्वक संपन्न किया, जिससे माह रमज़ान की शुरुआत हाज़िरीन के लिए यादगार बन गई।