त्योहारों से पहले मकान खाली कराने पर रोक की मांग, ग्रामीणों ने आयुक्त को सौंपा ज्ञापन

बरेली। तहसील सदर के ग्राम चंदपुर बिचपुरी डोरिया के सैकड़ों ग्रामीणों ने आज मंडल आयुक्त कार्यालय पहुंचकर बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा जारी मकान खाली कराने के नोटिसों के खिलाफ ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के लगभग 70–80 मकानों में रहने वाले लोग गरीब मजदूर हैं, जिनके पास रहने के लिए कोई अन्य मकान या संपत्ति नहीं है। उन्होंने मांग की कि रमजान, होली और ईद जैसे त्योहार नजदीक होने के कारण फिलहाल मकान खाली कराने की कार्रवाई रोकी जाए और प्रभावित परिवारों के लिए पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

ज्ञापन सौंपने के दौरान आजाद समाज पार्टी कांशीराम के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य एवं प्रदेश उपाध्यक्ष अच्छन अंसारी एडवोकेट और जिला अध्यक्ष मनोज सागर ने कहा कि गरीब मजदूरों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस प्रतिनिधिमंडल में मोहम्मद रियाज, नईम कुरैशी, जितेंद्र सिंह गौतम, मनोज वाल्मीकि, विशन कुमार सागर, प्रदीप मौर्य एडवोकेट और मोहम्मद अजहर अंसारी सहित कई अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
मंडल आयुक्त ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि किसी के साथ नाइंसाफी नहीं होने दी जाएगी और मामले में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन प्रभावित लोगों की कठिनाइयों को समझते हुए उचित कदम उठाएगा। ग्रामीणों और राजनीतिक संगठनों ने भी जोर देकर कहा कि त्योहारों के समय किसी भी परिवार को बेघर नहीं किया जाना चाहिए और पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि मकान खाली कराने का नोटिस मिलने से परिवारों में चिंता और तनाव बढ़ गया है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि इस मामले को तत्काल गंभीरता से लिया जाए और गरीब मजदूर परिवारों की सुरक्षा और रहने की सुविधा सुनिश्चित की जाए। इस मौके पर भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी मौजूद रहे और उन्होंने ग्रामीणों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
ज्ञापन सौंपने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देता है, तो वे आगामी दिनों में व्यापक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने आशा जताई कि प्रशासनिक अधिकारियों की संवेदनशीलता के कारण कोई भी गरीब परिवार बेघर नहीं होगा और त्योहारों के समय उनकी समस्याओं का निवारण किया जाएगा। इस तरह यह मामला सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है और प्रभावित परिवारों के पक्ष में प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजर है।