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उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी का बरेली में भव्य स्वागत: यूसीसी और राम मंदिर पर दिया बड़ा बयान

रिपोर्ट - सैयद मारूफ अली

बरेली, 31 मार्च 2025: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का सोमवार को बरेली में भव्य स्वागत किया गया। यह सम्मान समारोह बरेली के मेयर और इनवर्टिस यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. उमेश गौतम द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें धामी को उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून लागू करने के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कई वरिष्ठ नेता, विधायक, छात्र-छात्राएं और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अपने संबोधन में धामी ने यूसीसी के महत्व को रेखांकित किया और विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर जमकर निशाना साधा।

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यूसीसी: समाज सुधार का एक मजबूत कदम

सीएम धामी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने यूसीसी को लागू कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने इसे समाज में व्याप्त कुरीतियों को खत्म करने का माध्यम बताते हुए कहा, “हम किसी धर्म या समाज का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि पुरातन परंपराओं में सुधार लाने का प्रयास कर रहे हैं।” धामी ने बताया कि यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड की मुस्लिम महिलाएं उनसे मिलकर इस कानून की सराहना करती हैं और धन्यवाद देती हैं।

उन्होंने कहा, “लंबे समय से उत्तराखंड में सरकार बदलने की परंपरा थी, लेकिन यूसीसी जैसे जनहितकारी फैसलों के कारण जनता ने हमें दोबारा सत्ता सौंपी। यह कानून न केवल उत्तराखंड, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा बन रहा है।” धामी ने इसे एक नई चेतना और ऊर्जा का प्रतीक बताया, जो पूरे भारत में समानता और न्याय की भावना को मजबूत करेगा।

कांग्रेस और सपा पर तीखा हमला

अपने संबोधन में धामी ने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “कई वर्षों तक एक ऐसी पार्टी सत्ता में रही, जिसने अपने स्वार्थ के लिए यूसीसी जैसे कानून को लागू करने की हिम्मत नहीं दिखाई। दुनिया के कई देशों, जिनमें मुस्लिम राष्ट्र भी शामिल हैं, वहां यह कानून लागू है, लेकिन भारत में इसे रोकने की कोशिश की गई।”

इसके साथ ही, धामी ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में न तो राम मंदिर बन सका और न ही कारसेवकों के हित में कोई कदम उठाया गया। उल्टा, निहत्थे कारसेवकों पर गोलियां चलाई गईं।” यह बयान अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के संदर्भ में दिया गया, जिसे बीजेपी अपनी बड़ी उपलब्धि मानती है।

यूसीसी: उत्तराखंड से देशव्यापी पहल की शुरुआत

मीडिया को दिए साक्षात्कार में धामी ने यूसीसी को जनता की मांग करार दिया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में यह कानून लागू किया गया है। जिस तरह गंगोत्री से मां गंगा निकलकर पूरे देश को पवित्र करती है, उसी तरह यूसीसी उत्तराखंड से शुरू होकर पूरे देश में लागू होगा।” धामी ने दावा किया कि यह कानून सामाजिक समरसता और महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होगा।

उन्होंने यूसीसी के विरोधियों को भी आड़े हाथों लिया और कहा, “जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वे जनता की भावनाओं से कटे हुए हैं। देश की जनता आज यूसीसी की मांग कर रही है और यह समय की जरूरत है।”

बरेली में सम्मान समारोह का उत्साह

बरेली में आयोजित इस सम्मान समारोह में मेयर डॉ. उमेश गौतम ने धामी की प्रशंसा करते हुए कहा कि यूसीसी लागू करना एक साहसिक और दूरदर्शी कदम है। समारोह में मौजूद छात्र-छात्राओं और नागरिकों ने भी धामी के विचारों का उत्साहपूर्वक समर्थन किया। बीजेपी नेताओं ने इसे पार्टी की जनकल्याणकारी नीतियों का हिस्सा बताया और कहा कि यह कानून सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है।

भविष्य की राह और चुनौतियां

धामी ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि यूसीसी का उद्देश्य किसी भी समुदाय को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि यह समाज में एकरूपता और समानता लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप काम कर रही है। यूसीसी लागू करना हमारा वादा था, जिसे हमने पूरा किया।”

उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद अब अन्य बीजेपी शासित राज्य भी इस दिशा में कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। धामी का यह बयान कि यह कानून पूरे देश में लागू होगा, राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, विपक्षी दलों का कहना है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है, जिसके जवाब में धामी ने कहा कि यह आरोप निराधार हैं और जनता इसका समर्थन कर रही है।

 एक नई शुरुआत

पुष्कर सिंह धामी का बरेली दौरा और उनका संबोधन न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश है। यूसीसी को लेकर उनकी प्रतिबद्धता और विपक्ष पर तीखे हमले यह दर्शाते हैं कि बीजेपी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाना चाहती है। धामी का यह कथन कि “अखिलेश के पिताजी के राज में राम मंदिर नहीं बन पाया और कारसेवकों पर गोलियां चलीं” सपा और कांग्रेस को घेरने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यूसीसी और राम मंदिर जैसे मुद्दे भारतीय राजनीति में और भी गरमाहट ला सकते हैं।

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