जेल से रिहा होने के बाद शाहजहांपुर पहुंचे फिल्म अभिनेता, कहा– “समय सच्चाई सामने लाएगा”

शाहजहांपुर। जेल से रिहा होने के बाद फिल्म अभिनेता अपने गृह जनपद शाहजहांपुर पहुंचे, जहां उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए भावुक अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जन्मभूमि शाहजहांपुर की धरती पर कदम रखना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो मामला माननीय हाईकोर्ट में विचाराधीन है, उस पर कानूनी जवाब उनके अधिवक्ता भास्कर उपाध्याय देंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने वकील को पूरे मामले में तथ्यात्मक और विधिक रूप से पक्ष रखने की जिम्मेदारी सौंपी है।
अभिनेता ने कहा कि वह जल्द ही देश की मीडिया के सामने विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, लेकिन फिलहाल समयाभाव के कारण संक्षेप में अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने देश और दुनिया भर के उन लोगों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने कठिन समय में उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि बचपन से लेकर अब तक उन्हें बच्चों, बुजुर्गों और युवाओं का आशीर्वाद मिला है, जिसने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। उन्होंने खुद को एक “नन्हा बीज” बताते हुए कहा कि लोगों के स्नेह और समर्थन ने उन्हें सींचा है।
सोशल मीडिया के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह उनके लिए एक बच्चे की तरह है, जिसके माध्यम से देश-विदेश के लोग उनसे जुड़े। उन्होंने भारतीय सिनेमा में अपने करीब तीन दशक के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि अगले वर्ष उनके करियर को तीस वर्ष पूरे हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी जन्मभूमि कुंडरा, शाहजहांपुर है और कर्मभूमि मुंबई रही है, जहां उन्होंने लगातार सिनेमा की सेवा की है।
अपने संबोधन में अभिनेता ने कहा कि “हर दिन एक नई शुरुआत है, हर दिन सीखने का दिन है।” उन्होंने विश्वास जताया कि समय ही सबसे बड़ा निर्णायक होता है और सच्चाई को सामने लाता है। उन्होंने कहा कि वह देश के कानून और न्याय व्यवस्था का सम्मान करते हैं और जहां भी आवश्यक होगा, आदेशों का पालन करने के लिए उपस्थित रहेंगे।
शाहजहांपुर को शहीदों की भूमि बताते हुए उन्होंने ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खान और राम प्रसाद बिस्मिल को नमन किया। उन्होंने कहा कि शाहजहांपुर की रामलीला में अंगद की भूमिका निभाने का अवसर उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यहीं से मिले आशीर्वाद ने उन्हें देश-दुनिया में पहचान दिलाई।
अंत में अभिनेता ने कहा कि उन्होंने जीवन में कई अवसर देखे, लेकिन कभी अपनी निष्ठा नहीं बदली। शाहजहांपुर की मिट्टी, यहां के लोगों और रोहिलखंड की धरती से उन्हें विशेष लगाव है। उन्होंने समर्थकों और आलोचकों—दोनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए सभी को प्रेम और धन्यवाद दिया।