AdminstrationBareillyLatestUttar Pradesh

ग्राम प्रधानों से रिकवरी का आदेश: अखिल भारतीय प्रधान संगठन ने जताया विरोध, बताया गलत

रिपोर्ट - सैयद मारूफ अली

बरेली में जिला अधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन

बरेली : अखिल भारतीय प्रधान संगठन ने बरेली के जिला अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर ग्राम प्रधानों से की जा रही रिकवरी के आदेश का कड़ा विरोध जताया है। संगठन ने इसे अनुचित और गलत करार देते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह मामला नवाबगंज ब्लॉक में मनरेगा लोकपाल की शिकायत और उसकी जांच से जुड़ा है, जिसमें सीआईवी बोर्ड, महिला श्रमिकों और वृक्षारोपण कार्यों पर रिकवरी निकाली गई है। संगठन का कहना है कि यह कदम नियमों के खिलाफ है और ग्राम पंचायतों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाला है।

सीआईवी बोर्ड पर रिकवरी का विवाद

अखिल भारतीय प्रधान संगठन के अध्यक्ष सुदेश पाण्डेय ने बताया कि नवाबगंज ब्लॉक में लोकपाल मनरेगा की जांच के बाद सीआईवी बोर्ड पर चार गुना रिकवरी निकाली गई है। उनका कहना है कि मौके पर सीआईवी बोर्ड लगा हुआ है और इसके फोटोग्राफ पंचायत की फाइलों में संलग्न हैं। पाण्डेय ने स्पष्ट किया कि जिन कार्यों पर सीआईवी बोर्ड नहीं लगा, उनका कोई भुगतान ग्राम पंचायत द्वारा नहीं किया गया।

मनरेगा योजना में रिकवरी का प्रावधान तभी लागू होता है, जब सामग्री का उपयोग न हो और उसका भुगतान कर दिया जाए। लेकिन सीआईवी बोर्ड के मामले में न तो भुगतान हुआ और न ही इसे लगाने में कोई अनियमितता हुई। फिर भी, इसे गबन का आरोप लगाकर रिकवरी निकालना पूरी तरह गलत है।

वृक्षारोपण और नर्सरी से पौधों की खरीद पर सवाल

संगठन ने वृक्षारोपण कार्यों पर भी रिकवरी को अनुचित ठहराया। सरकार के निर्देशानुसार, ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत सार्वजनिक और व्यक्तिगत कार्यों के लिए उद्यान विभाग से पंजीकृत नर्सरी से पौधे खरीदे गए। इनका भुगतान सीधे फर्म के खाते में मनरेगा योजना से किया गया। हालांकि, कुछ छायादार और फलदार पौधे सरकारी नर्सरी में उपलब्ध न होने के कारण व्यक्तिगत नर्सरी से खरीदे गए। इन पौधों को लगाने की मजदूरी मनरेगा श्रमिकों के खाते में सीधे ट्रांसफर की गई। इसके बावजूद, लोकपाल ने सामग्री भुगतान पर पूर्ण रिकवरी निकाल दी, जिसे संगठन ने नियमों के खिलाफ बताया।

पक्के कार्यों पर रिकवरी को बताया अनुचित

सत्र 2021-22 में मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायतों में कुछ पक्के कार्य कराए गए थे। इन कार्यों की आईडी ब्लॉक द्वारा बनाई गई और प्राकलन तकनीकी सहायक ने तैयार किया। कार्यों की तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति बीडीओ (ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर) ने दी। ग्राम प्रधानों द्वारा इन कार्यों को पूर्ण कराने के बाद भुगतान की प्रक्रिया भी नियमानुसार हुई। प्रथम डोगल ब्लॉक द्वारा, मनरेगा अकाउंटेंट द्वारा द्वितीय डोगल और बीडीओ द्वारा तृतीय डोगल लगाया गया। इसके बावजूद इन कार्यों पर पूर्ण रिकवरी निकाली गई, जिसे संगठन ने अन्यायपूर्ण करार दिया। सुदेश पाण्डेय ने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी, फिर भी रिकवरी का आदेश गलत है।

संगठन की मांग: निष्पक्ष जांच और न्याय

अखिल भारतीय प्रधान संगठन ने जिला अधिकारी से इस मामले में उचित और निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि ग्राम प्रधान ग्रामीण विकास के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन इस तरह के गलत आदेशों से उनका मनोबल टूटता है। ज्ञापन सौंपने वालों में ग्राम प्रधान हेतराम सागर, हरीश कुमार, जमुना देवी, बी एल भास्कर और श्यामा चरन सहित कई अन्य शामिल थे। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आगे बड़ा आंदोलन शुरू कर सकते हैं।

निष्कर्ष

यह मामला ग्राम पंचायतों और प्रशासन के बीच तनाव को दर्शाता है। अखिल भारतीय प्रधान संगठन का मानना है कि रिकवरी का यह आदेश न केवल अनुचित है, बल्कि ग्राम विकास की प्रक्रिया को भी बाधित कर सकता है। अब सभी की नजरें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं, जो इस विवाद का समाधान कर सकती है।

About Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

error: Content is protected !!