मंदिर की प्राचीन जमीन पर सड़क निर्माण का विरोध

बरेली । चौधरी तालाब महामाया होलिका मंदिर की प्राचीन व निजी जमीन पर हो रहे कथित अवैध सड़क निर्माण को लेकर अखिल भारत हिन्दू महासभा ने तीखा विरोध जताया है। संगठन ने सोमवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि नगर निगम के अधिकारियों और भूमाफियाओं की मिलीभगत से मंदिर की भूमि पर डल रही सड़क को तत्काल रोका जाए और जारी टेंडर को निरस्त किया जाए। महासभा का आरोप है कि यह कदम न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है, बल्कि सैकड़ों साल पुरानी धरोहर के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा कर रहा है।
प्राचीन धरोहर की जमीन पर निर्माण का आरोप
मंडल अध्यक्ष पंकज पाठक ने बताया कि थाना किला क्षेत्र स्थित चौधरी तालाब के निकट महामाया होलिका मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। वर्षों से यह मंदिर धार्मिक आयोजनों का केंद्र बिंदु रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भूमाफिया लंबे समय से इस भूमि पर कब्जा जमाने और इसे बेचने की साजिश रच रहे हैं।
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संगठन के अनुसार, भूमाफियाओं को नगर निगम के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते अब मंदिर की जमीन में ही सड़क डलवाई जा रही है। महासभा ने आशंका जताई कि सड़क निर्माण से मंदिर की भूमि सिकुड़ जाएगी और धीरे-धीरे प्राचीन धरोहर का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।

धार्मिक आस्था और धरोहर पर संकट
पंकज पाठक ने कहा कि नगर निगम का यह कदम आस्था पर कुठाराघात जैसा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर न सिर्फ स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए पूजनीय स्थल है, बल्कि यह क्षेत्र के इतिहास और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में मंदिर की भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाएगा, बल्कि पुरातन धरोहर के विनाश की साजिश भी साबित होगा।
संगठन का कहना है कि शहर की सड़क व्यवस्था सुधारने के लिए वैकल्पिक मार्ग निकाले जा सकते हैं, लेकिन प्राचीन धार्मिक स्थल की जमीन से छेड़छाड़ किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी।
आंदोलन की चेतावनी
महासभा ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में साफ चेतावनी दी है कि यदि सड़क निर्माण को नहीं रोका गया तो संगठन बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा। पंकज पाठक ने कहा, “धार्मिक धरोहर की रक्षा के लिए किसी भी स्तर पर संघर्ष किया जाएगा। मंदिर की जमीन पर अतिक्रमण करने वालों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि नगर निगम की इस कार्यवाही ने जनता की आस्था को गहरा आघात पहुंचाया है। यदि जिला प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाया, तो स्थिति बेकाबू हो सकती है।
ज्ञापन में उठाई गई मांगें
संगठन ने जिलाधिकारी से प्रमुख रूप से तीन मांगें कीं:
1. मंदिर की जमीन पर हो रहे सड़क निर्माण को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
2. नगर निगम द्वारा जारी टेंडर को निरस्त कर प्राचीन मंदिर की भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
3. भूमाफियाओं और नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में धार्मिक स्थलों पर अतिक्रमण का प्रयास न हो।
शिकायतकर्ताओं की मौजूदगी
ज्ञापन सौंपने के दौरान पंकज पाठक के साथ अलका शर्मा, नितेश सक्सेना, मुकेश कुमार, अरुण कुमार, विकास चौहान और ध्रुव शर्मा मौजूद रहे। इन सभी ने संयुक्त रूप से प्रशासन से अपील की कि मंदिर की भूमि को बचाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप किया जाए।
अखिल भारत हिन्दू महासभा का यह कदम धार्मिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर समाज में बढ़ती चिंता को दर्शाता है। प्राचीन मंदिरों की जमीनों पर हो रहे अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर अंकुश लगाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं और क्या मंदिर की भूमि को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या फिर यह मामला भी केवल आश्वासनों तक ही सीमित रह जाता है।