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रमज़ान का पहला जुमा: मस्जिदों में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

बरेली। माहे रमज़ान के पहले जुमा पर शहर की मस्जिदें नमाज़ियों से खचाखच भरी रहीं। अकीदतमंदों ने पूरे एहतराम और अकीदत के साथ जुमे की नमाज़ अदा की। नमाज़ से पहले उलेमाओं ने रमज़ान की फ़ज़ीलत, बरकत और इबादत की अहमियत पर तकरीर करते हुए रोज़ेदारों को नेक अमल और परहेज़गारी की ताकीद की।

कोतवाली स्थित मोती मस्जिद में जुमे से पहले तकरीर करते हुए हाफिज़ चाँद खान ने कहा कि तरावीह की नमाज़ कुरआन मुकम्मल होने के बाद भी जारी रखनी चाहिए। उन्होंने बताया कि तरावीह चाँद दिखाई देने के साथ शुरू होती है और ईद का चाँद नज़र आने पर मुकम्मल होती है। उन्होंने रोज़ेदारों को पूरे महीने तरावीह की पाबंदी करने की नसीहत देते हुए कहा कि रमज़ान में नफ़्ल का सवाब फ़र्ज़ के बराबर और फ़र्ज़ का सवाब सत्तर गुना तक बढ़ा दिया जाता है, इसलिए इस पाक महीने में ज़्यादा से ज़्यादा इबादत और नेकियां करनी चाहिए।

मस्जिद नोमहला शरीफ में इमाम मुफ्ती अब्दुल बाकी मरकज़ी ने रमज़ान की फ़ज़ीलत बयान करते हुए कहा कि इस बार रमज़ान में पांच जुमे हैं, जो इबादत का खास मौका है। उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तआला सबकी इबादतों को कबूल फरमाए।

इस अवसर पर बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक एवं समाजसेवी पम्मी ख़ाँ वारसी ने जुमे की नमाज़ की मुबारकबाद देते हुए कहा कि रमज़ान शरीफ़ इंसान को इबादत, सब्र और इंसानियत का पैगाम देता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सहरी और इफ्तारी में अपने आसपास के जरूरतमंदों का ख्याल रखें और असल हकदारों की मदद करें। उन्होंने कहा कि जिस तरह रमज़ान में मस्जिदें नमाज़ियों से भरी रहती हैं, उसी तरह साल भर पांच वक्त की नमाज़ की पाबंदी करनी चाहिए। इंसानियत, मोहब्बत और भाईचारे को कायम रखना ही रमज़ान का असली मकसद है।

दरगाह नासिर मियाँ रहमतुल्लाह अलेह के सज्जादानशीन हज़रत ख़्वाजा सुल्तान अहमद नासरी ने बताया कि मस्जिद नोमहला शरीफ में रोज़ सामूहिक रोज़ा इफ्तार का इंतजाम किया गया है। उन्होंने कहा कि 30 रमज़ान तक दरगाह पर इफ्तारी का दस्तरख्वान परदेसियों, मुसाफिरों और आम-ओ-खास सभी के लिए जारी रहेगा।

जुमे की नमाज़ के मौके पर मस्जिदों में अमन, खुशहाली और मुल्क की तरक्की के लिए खास दुआएं की गईं। नमाज़ के बाद लोगों ने एक-दूसरे को रमज़ान और पहले जुमे की मुबारकबाद दी। इस दौरान बड़ी तादाद में नमाज़ी मौजूद रहे और पूरे माहौल में रूहानियत और अकीदत का रंग नजर आया।

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