प्रदेश सरकार के खिलाफ कांग्रेस का शांतिपूर्ण सत्याग्रह, लखनऊ घटना की निंदा

बरेली। लखनऊ में 17 फरवरी को विधानसभा घेराव के दौरान हुए विवादास्पद घटनाक्रम के विरोध में जिला और महानगर कांग्रेस कमेटियों ने संयुक्त रूप से गांधी प्रतिमा स्थल पर शांतिपूर्ण सत्याग्रह आयोजित किया। इस अवसर पर कांग्रेस के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग की तीव्र आलोचना की और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।

कार्यक्रम में नेताओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे कांग्रेस नेताओं पर अनावश्यक बल का प्रयोग किया गया, जिससे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय समेत कई कार्यकर्ता घायल हुए। कांग्रेस नेताओं ने इस घटना को विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास करार देते हुए कहा कि हर नागरिक और राजनीतिक दल को अपने मत और विरोध प्रकट करने का संवैधानिक अधिकार है।
जिला और महानगर कांग्रेस कमेटियों के संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सदैव अन्याय और दमन के खिलाफ गांधीवादी विचारधारा पर चलती रही है और आगे भी इसी मार्ग पर संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्याग्रह के माध्यम से सरकार को यह संदेश दिया गया कि कांग्रेस कार्यकर्ता भयभीत नहीं होंगे और जनहित के मुद्दों पर आंदोलन जारी रहेगा।
सत्याग्रह कार्यक्रम में प्रेम प्रकाश अग्रवाल, पंडित राज शर्मा, देवेंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, रमेश श्रीवास्तव, हरीश गंगवार सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ किया गया, जिसमें सभी ने एकजुट होकर लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित के मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धता जताई।
कांग्रेस नेताओं ने इस अवसर पर सरकार से अपील की कि विपक्ष की आवाज को दबाने के बजाय उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सुनने और गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है और जनता की समस्याओं को उजागर करने का संवैधानिक अधिकार है।
कार्यक्रम में शामिल पदाधिकारियों ने मीडिया से संवाद करते हुए बताया कि प्रदेश सरकार को यह समझना होगा कि लोकतांत्रिक मूल्य और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के बिना शासन नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास जारी रखा, तो कांग्रेस जनहित और लोकतंत्र के लिए संगठित होकर और व्यापक आंदोलनों के माध्यम से अपनी भूमिका निभाएगी।
इस तरह गांधी प्रतिमा स्थल पर आयोजित यह शांतिपूर्ण सत्याग्रह न केवल 17 फरवरी की घटना की निंदा था, बल्कि प्रदेश सरकार को चेतावनी भी कि लोकतांत्रिक अधिकारों और जनहित के मुद्दों पर कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी।