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फर्जी दस्तावेज बनाने वाला विजय मैसी गिरफ्तार: बरेली में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

रिपोर्ट - सैयद मारूफ अली

बरेली, 24 मार्च 2025: फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों को ठगने वाले एक शातिर युवक को बरेली पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी विजय मैसी ने वेलफेयर एसोसिएशन का फर्जी डायरेक्टर बनकर लोगों के महत्वपूर्ण प्रपत्र और पहचान पत्र बनाए और इसके बदले मोटी रकम वसूल की। पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की संयुक्त टीम ने सोमवार को छापेमारी कर उसे पटेल नगर स्थित उसके कार्यालय से धर दबोचा। इस कार्रवाई में कई फर्जी दस्तावेज और सामग्री भी बरामद की गई है।

फर्जी कार्यालय से चल रहा था खेल

प्रेमनगर थाना क्षेत्र के पटेल नगर में विजय मैसी ने “कोवर्ट इंटेलिजेंस नेटवर्क सोशल वेलफेयर एसोसिएशन” नाम से एक फर्जी कार्यालय स्थापित किया था। इस कार्यालय में वह खुद को एक बड़े अधिकारी के तौर पर पेश करता था। पुलिस को सूचना मिली थी कि यहाँ फर्जी आईडी कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बनाकर लोगों से पैसे ठगे जा रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस और एसओजी की टीम ने सोमवार को कार्यालय पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान विजय मैसी अपने कार्यालय में कुर्सी पर बैठा हुआ मिला, जैसे वह कोई वरिष्ठ अधिकारी हो।

पूछताछ में खुला राज: केवल 12वीं पास है आरोपी

पुलिस पूछताछ में विजय मैसी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि वह मूल रूप से उत्तराखंड के चंपावत जिले के बनबसा थाना क्षेत्र के बमन पुरी का निवासी है और वर्तमान में बरेली के इज्जत नगर थाना क्षेत्र के आशुतोष सिटी में रहता है। उसका पूरा नाम विजय मैसी पुत्र स्वर्गीय ननकू लाल है।

उसने यह भी स्वीकार किया कि वह केवल 12वीं कक्षा तक पढ़ा है और उसके पास कोई डिग्री या वैधानिक योग्यता नहीं है। पहले वह एक सिक्योरिटी कंपनी में नौकरी करता था, लेकिन बाद में उसने फर्जी दस्तावेज बनाने का धंधा शुरू कर दिया। उसने बताया कि वह “कोवर्ट इंटेलिजेंस नेटवर्क सोशल वेलफेयर सोसाइटी” के नाम से लोगों को झाँसा देता था और उनके लिए फर्जी आईडी व अन्य प्रपत्र बनाकर पैसे वसूलता था।

पुलिस ने बरामद किए फर्जी दस्तावेज और उपकरण

छापेमारी के दौरान पुलिस ने विजय मैसी के कार्यालय से कई आपत्तिजनक सामग्रियाँ बरामद कीं। इसमें पुलिस विभाग के 25 फर्जी आई कार्ड, अन्य विभागों के कार्ड, दो लिफाफों में चार आई कार्ड, दो पेन ड्राइव, डिजिटल हस्ताक्षर और भारत सरकार को संबोधित एक पत्र शामिल हैं। इसके अलावा तीन अन्य लिफाफे मिले, जिनमें बरेली और रुद्रपुर के जिला अधिकारियों को संबोधित पत्र थे। पुलिस ने दो नमूना मुहरें भी जब्त कीं, जो फर्जी दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल की जा रही थीं। ये सभी सबूत विजय मैसी के अपराध को साबित करने के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

जेल भेजा गया आरोपी

पुलिस ने विजय मैसी को गिरफ्तार करने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस इस मामले में आगे की जाँच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि विजय मैसी ने कितने लोगों को ठगा और इस धंधे में उसके साथ और कौन-कौन शामिल हो सकता है। पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित अपराध का हिस्सा भी हो सकता है, जिसके तार अन्य शहरों से भी जुड़े हो सकते हैं।

लोगों से सावधानी बरतने की अपील

इस घटना के बाद पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी दस्तावेज या आईडी बनवाने से पहले उसकी वैधता की जाँच करें। फर्जी संगठनों और व्यक्तियों से सावधान रहने की सलाह दी गई है। पुलिस का कहना है कि ऐसे अपराधों पर नकेल कसने के लिए आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

निष्कर्ष

विजय मैसी की गिरफ्तारी से बरेली में फर्जी दस्तावेज बनाने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। यह घटना समाज में जागरूकता की जरूरत को दर्शाती है ताकि लोग ऐसे ठगों के झाँसे में न आएँ। पुलिस की इस कार्रवाई से आम जनता में राहत की भावना है, और उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे अपराधों पर और प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सकेगी।

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