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वरिष्ठ IAS अभिषेक प्रकाश भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने 20 मार्च 2025 को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत की गई। अभिषेक प्रकाश जो 2006 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, हाल तक इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और औद्योगिक विकास विभाग के सचिव के पद पर कार्यरत थे। उनके निलंबन का कारण एक सोलर प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए रिश्वत मांगने का आरोप है।

मामले का विवरण

अभिषेक प्रकाश पर आरोप है कि उन्होंने सोलर सेक्टर में निवेश करने वाले एक उद्यमी से प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए कमीशन की मांग की थी। यह मांग एक बिचौलिए निकांत जैन (उम्र 40) के जरिए की गई थी। शिकायतकर्ता उद्यमी ने बताया कि उनकी कंपनी, जिसका नाम कुछ रिपोर्ट्स में SAEL सोलर के रूप में सामने आया है, ने इन्वेस्ट यूपी योजना के तहत सोलर प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया था। इस आवेदन को मंजूरी देने के लिए अभिषेक प्रकाश ने कथित तौर पर 5% कमीशन की मांग की।

शिकायत और कार्रवाई

उद्यमी की शिकायत के बाद पुलिस और विशेष कार्य बल (STF) ने जांच शुरू की। निकांत जैन को 19 मार्च 2025 को लखनऊ के गोमती नगर क्षेत्र में शहीद पथ के पास गिरफ्तार कर लिया गया। प्रारंभिक जांच में अभिषेक प्रकाश के खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत मिले, जिसके आधार पर सरकार ने तत्काल प्रभाव से उनका निलंबन कर दिया।

निलंबन आदेश –निलंबन आदेश में कहा गया है कि अभिषेक प्रकाश को “ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स-1968 के नियम-3 का उल्लंघन” करने और “प्रोजेक्ट स्वीकृति में अनियमितताओं” का दोषी पाया गया। उनके खिलाफ नियम-8 के तहत बड़ी सजा के लिए अनुशासनात्मक कार्यवाही भी शुरू की गई है।

अभिषेक प्रकाश का बैकग्राउंड,जन्म और शिक्षा- अभिषेक प्रकाश का जन्म 1982 में बिहार में हुआ था। उन्होंने आईआईटी रुड़की से बीटेक की डिग्री हासिल की और फिर यूपीएससी परीक्षा पास कर 2006 में आईएएस बने।

करियर – अपने करियर में उन्होंने लखनऊ, हमीरपुर, अलीगढ़, बरेली और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों के जिलाधिकारी (DM) के रूप में काम किया। लखनऊ के डीएम रहते हुए उनकी कार्यशैली चर्चा में रही थी। हाल ही में इन्वेस्ट यूपी के सीईओ के तौर पर वे राज्य में निवेश को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

आरोपों की गंभीरता-कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि यह मामला केवल सोलर प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है। अभिषेक प्रकाश पर लखनऊ डिफेंस एक्सपो और डिफेंस कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण में भी भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। हालांकि, सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इन अतिरिक्त आरोपों की पुष्टि नहीं की है।

वर्तमान स्थिति,निकांत जैन – बिचौलिए को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। वह अभिषेक प्रकाश और उद्यमी के बीच लिंक के रूप में काम कर रहा था। अभिषेक प्रकाश निलंबन के बाद उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं है। कुछ सूत्रों का कहना है कि वह फरार हैं, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

जांच – पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर मामले की गहन जांच चल रही है। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि इस कार्रवाई से वास्तविक निवेश परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

प्रभाव – यह निलंबन प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा रहा है, क्योंकि अभिषेक प्रकाश एक प्रभावशाली और चर्चित अधिकारी रहे हैं। योगी सरकार का यह कदम भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख को दर्शाता है। साथ ही, यह सवाल भी उठता है कि क्या इस मामले में और बड़े खुलासे होंगे।

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